यहां हनुमान जी की पूजा उनके बेटे मकरध्वज के साथ होती है


दांडी हनुमान जी मन्दिर, बेट द्वारका, द्वारका, ओखा, गुजरात (Dandi Hanuman ji Temple,Beyt Dwarka (Bet Dwarka), Okha, Gujarat)

बेट द्वारका स्थान वैसे तो भगवान श्री कृष्ण की वजह से जाना जाता है लेकिन, यहां हनुमान जी का एक खास मन्दिर है जो काफी फेमस है। ये है दांडी हनुमान मंदिर। मन्दिर की खासियत यह है कि यहां हनुमान जी के साथ उनके पुत्र मकरध्वज की भी प्रतिमा है। यह ​मन्दिर करीब 500 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां हनुमान जी अपने पुत्र से पहली बार मिले थे। इस मन्दिर के संबंध में एक और लोक मान्यता है कि कई साल पहले हनुमान जी की मूर्ति बड़ी और मकरध्वज की मूर्ति छोटी थी। मकरध्वज की मूर्ति अपने आप बढ़ गई और अब हनुमान जी के बराबर आ गई। इन दोनों प्रतिमाओं के पास कोई शस्त्र नहीं है और दोनों प्रसन्नचित मुद्रा में नजर आते है।
मकरध्वज की उत्पत्ति
हनुमान जी को ब्रहृमचारी कहा गया है और ऐसे में उनके पुत्र होने को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। धर्म शास्त्रों के मुताबिक हनुमान जी सीता की खोज में लंका गए थे। वहां मेघनाथ ने उन्हें पकड़कर रावण के दरबार में प्रस्तुत किया था। जहां उनकी पूंछ में आग लगा दी गई। हनुमान जी ने जलती पूंछ से लंका जला दी थी। वे अपनी जलती पूंछ बुझाने के लिए समुद्र में गए थे तब उनके पसीने की एक बूंद पानी में टपकी जिसे एक मछली ने पी लिया था। उसी पसीने की बूंद से वह मछली गर्भवती हो गई और उससे उसे एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम पड़ा “मकरध्वज”। मकरध्वज भी हनुमानजी के समान ही महान पराक्रमी और तेजस्वी था और उसे अहिरावण ने पाताल लोक का द्वारपाल नियुक्त किया गया था। एक बार जब अहिरावण राम और लक्ष्मण को देवी के समक्ष बलि चढ़ाने के लिए पाताल ले आया था तब राम और लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए हनुमान पाताल लोक पहुंचे और वहां उनकी भेंट मकरध्वज से हुई। हनुमानजी और मकरध्वज के में घोर युद्ध हुआ। अंत में हनुमानजी ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया। मकरध्वज ने अपनी उत्पत्ति की कथा हनुमान को सुनाई। हनुमानजी ने अहिरावण का वध कर राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया। राम ने मकरध्वज को पाताल लोक का अधिपति नियुक्त कर धर्म मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

Dandi Hanuman ji Temple,Beyt Dwarka (Bet Dwarka), Okha, Gujarat on Google Map


कैसे पहुंचें (How To Reach)
यह मन्दिर गुजरात के तटीय शहर ओखा से करीब 35 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। ओखा तक रेल मार्ग या सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां से बेट द्वारका समुद्र में होकर जाना पड़ता है। वहां से आॅटो रिक्शा से मन्दिर तक पहुंचा जा सकता है। बेट द्वारका से मन्दिर की दूरी करीब पांच किलोमीटर है।


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