गीता में भी है गोकर्ण महादेव का जिक्र



गोकर्णनाथ महादेव मंदिर, मथुरा (Gokarn Nath Temple Mathura UP)

मथुरा के चारों कोनों पर चार शिव मंदिर हैं, जिन्हें मथुरा का क्षेत्रपाल कहा जाता है। पूर्व में पिघलेश्वर, पश्चिम में भूतेश्वर, दक्षिण में रंगेश्वर महादेव और उत्तर में गोकर्णेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर। गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर इतना प्राचीन मंदिर माना जाता है कि इसे कृष्ण कालीन बताया जाता है।

लोक आस्था के अनुसार इस मंदिर में ​विराजित शिव की मूर्ति महाकाल का रूप बताई जाती है। यह मंदिर एक टीले पर बना है। जिसे गोकर्णेश्वर अथवा कैलाश कहते हैं। लोक मान्यता के अनुसार गोकर्ण महादेव का जिक्र श्रीमद्भगवतगीता में भी मिलता है। यह मंदिर भगवान गोकर्णनाथ को समर्पित किया गया है। गाय के कान से जन्म लेने के कारण यह गोकर्णनाथ कहलाए।

लाखोरी ईंट व चूने से बने इस मंदिर में अष्टकोण गुम्बदीय छत है। उत्कीर्णित जंगले, दरवाजे पर पच्चीकारी, पत्थर से बनीं कमल पत्तियां व गुम्बद पर कलाकारी इसका मुख्य आकर्षण हैं।

धार्मिक आस्था के अनुसार जो व्यक्ति गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर में लगातार 40 दिन भगवान का शिव स्त्रोत का पाठ और गन्ने के रस से अभिषेक करता है वह सुखी, निरोगी और समृद्ध रहता है। संतान प्राप्ति के लिए यहां 16 सोमवार तक पूजा और व्रत किया जाता है।
मन्दिर में दर्शन का समय:
मंदिर दिन भर दर्शनार्थ खुला रहता है। दिन के समय कुछ घंटों के लिए दर्शन बंद रहते हैं।

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कैसे पहुंचें (How To Reach)
दिल्ली से दक्षिण भारत या मुम्बई जाने वाली सभी ट्रेनें मथुरा होकर गुजरती हैं। सडक द्वारा भी पहुंचा जा सकता है। आगरा से मात्र 55 किलोमीटर दूर है। घूमने के लिए टैक्सी कर सकते हैं, जिससे मथुरा, वृन्दावन एक दिन में घूमा जा सकता है। आॅटो और तांगें भी उपलब्ध है। गोवर्धन के लिये बस उपलब्ध है।

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