मेहरानगढ़ की प्राचीर से रानी करती थी इस कृष्ण मंदिर के दर्शन



राज रणछोड़ मंदिर, जोधपुर, राजस्थान (Raj RanChhor Temple, Jodhpur, Rajasthan)

सूर्यनगरी यानी जोधपुर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में राजरणछोड़जी का मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर विश्वप्रसिद्ध मेहरानगढ़ दुर्ग के नजदीक स्थित है और इसे लगभग 110 वर्ष पूर्व रानी राजकंवर ने बनवाया था।

झाड़ेची जी उर्फ रानी राजकंवर जामनगर के राजा वीभा की बेटी थीं और उनका पाणिग्रहण संस्कार जोधपुर के राजकुमार महाराजा जसवंतसिंह से हुआ था। रानी तेरह वर्ष की उम्र में मेहरानगढ़ दुर्ग में आई थीं और तब से कभी दुर्ग के बाहर नहीं निकलीं। महाराजा जसवंतसिंह के निधन के बाद उन्होंने अपने निजी एक लाख रुपए से अधिक व्यय कर अपने आराध्य देव कृष्ण का मंदिर बनवाया, जो राजरणछोड़जी के मंदिर के रूप में विख्यात हुआ।

सबसे खास बात यह थी कि वे अपने जीवन पर्यन्त पूजा के लिए कभी मंदिर में नहीं गईं। जोधपुर रेलवे स्टेशन के सामने की जमीन को तीस फीट ऊंचा बनाया गया, जिससे रानी मेहरानगढ़ की प्राचीर से ही कृष्ण के दर्शन कर सकें। मंदिर का पुजारी संध्या आरती की ज्योत को मंदिर के दरवाजे के बाहर लेकर खड़ा होता था। किले की प्राचीर से रानी उसी ज्योत के दर्शन करती थीं।

पत्थर पर उत्कीर्ण जानकारी के अनुसार रानी राजकंवर के पुत्र महाराजा सरदारसिंह की मौजूदगी में 12 जून, 1905 को यह मंदिर भक्तों के दर्शनार्थ खोला गया। यहां एक सराय भी है, जो अब जसवंत सराय के नाम से जानी जाती है।

राजरणछोड़ मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार काफी भव्य और कलात्मक है। लाल पत्थर से बने दो बड़े सुसज्जित स्तंभों पर बेल बूटों तथा सुंदर फूल पत्तियों की खुदाई तथा शीर्ष से दोनों स्तंभों को जोड़ने वाले मेहराब का आकर्षण सभी का मन मोह लेता है। मंदिर के अगले हिस्से के दोनों सिरों पर कलात्मक छतरियां हैं। मुख्य द्वार से लगभग तीस सीढ़ियां चढ़ने के बाद एक विशाल तोरणद्वार लगा है। सीढ़ियों के दोनों ओर खुले स्थान पर बारहदरियां हैं। मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर को तराश कर बनाई गई भगवान रणछोड़ की प्रतिमा स्थापित है।
मन्दिर में दर्शन का समय:
मंदिर सुबह 6.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है। इसके बाद यह सायं 5 बजे खुलता है और रात 9 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं। यहां जन्माष्टमी, अन्नकूट व श्रावण मास में झूलों का आयोजन होता है। श्रावण मास में विशाल चांदी से निर्मित झूले में ठाकुरजी को विराजित कर दशनार्थ रखा जाता है।

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कैसे पहुंचें (How To Reach)
हवाई मार्ग: जोधपुर एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर।

सड़क मार्ग: जोधपुर बस स्टैंड के नजदीक, जयपुर से 340 किलोमीटर।

रेल मार्ग
: जोधपुर रेलवे स्टेशन से 200 मीटर।
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