इस स्थान पर हुई थी वृहद् द्रव्यसंग्रह ग्रंथ की रचना

दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवरायपाटन (Digambar Jain, Atishay Kshetra, Keshorai Patan)

कोटा से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर मुम्बई—दिल्ली रेलमार्ग पर चम्बल नदी के किनारे बूंदी जिले की केशवरायपाटन तहसील पर यह क्षेत्र स्थित है। चम्बल नदी के किनारे पर होने के कारण सुरक्षा के लिए 12 फीट की दिवार बनाई गई है।

यह अतिशय क्षेत्र है। क्षेत्र पर मूलनायक प्रतिमा 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ की है। माना जाता है कि मूलनायक प्रतिमा की क्षेत्र पर संवत 336 में प्रतिष्ठा की गई थी। मूलनायक प्रतिमा का अतिप्राचीन होने का वर्णन कई ग्रंथो व काव्यों में किया गया है ।
लोकमत के अनुसार मूलनायक प्रतिमा को कई आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन बहुत अधिक मात्रा में दूध की धारा निकलने के कारण आक्रान्तों का प्रयास सफल नहीं हो सका।

यह भी माना जाता है कि पूर्व में यह स्थान आचार्य नेमीचन्द्र आश्रम पट्टन के नाम से प्रसिद्ध था तथा इसी स्थान पर वृहद् द्रव्यसंग्रह ग्रंथ की रचना की गई थी। इस क्षेत्र पर दिन में आकर दर्शन कर आगे यात्रा किया जाना उचित होगा।

मन्दिर में दर्शन का समय:
सुबह 5 बजे से रात्रि 9 बजे तक । समय ऋतुओं के अनुसार बदलता रहता है ।

Mangi Tungi Jain Tirth on Google Map

कैसे पहुंचें (How To Reach)

सड़क: बस स्टेण्ड केशवराय पाटन— 1 किलोमीटर

रेलवे स्टेशन: केशवराय पाटन— 5 किलोमीटर
क्षेत्र पर जाने हेतु कोटा व बूंदी से साधन उपलब्ध रहते है ।

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