अमरनाथ, श्रीनगर, कश्मीर (Amarnath, Srinagar, Kashmir)

शिवजी से अमर कथा सुनकर कबूतर का जोड़ा हो गया अमर
कश्मीर के श्रीनगर से उत्तर-पूर्व में स्थित बाबा अमरनाथ की गुफा पवित्र तीर्थ स्थल है। हर साल यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है। इसलिए स्वयं भू हिमानी शिवलिंग भी कहते है। शिवलिंग के दर्शन के लिए लाखों भक्त कई किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पार कर यहां पहुंचते है।

पवित्र गुफा की जानकारी एक मुस्लिम गड़रिये को 16 वीं सदी के पूर्वाद्ध में मिली थी। उसके बाद यह स्थान प्रसिद्ध होता चला गया। आज भी यहां जो चढ़ावा आता है उसका 25 फीसदी हिस्सा गड़रिये के परिवार को मिलता है। अमरनाथ यात्रा हर साल आषाढ़ पूर्णिमा को शुरू होती है और रक्षाबंधन तक चलती है। चन्द्रमा के घटने-बढऩे के शिवलिंग का आकार भी बदलता रहता है। बर्फानी बाबा के दर्शन के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड से रजिस्ट्रेशन करना आवश्यक होता है। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया यात्रा शुरू होने के करीब तीन महीने पहले शुरू हो जाती है।
अमरनाथ की गुफा समुद्र तल से करीब 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। गुफा की लम्बाई भीतर की ओर 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊंची है। इस गुफा में बर्फ गिरती रहती है। इससे करीब 10 फुट ऊंचा शिवलिंग हर साल बनता है। इस शिवलिंग का आकार कई बार घट भी जाता है। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कुछ दूरी पर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड बनते हैं।

कहा जाता है कि माता पार्वती ने एक बार भगवान शिव से अमरत्व की कथा सुनने की जिद कर ली। जो कोई इस कथा को सुन लेता था वह अमर हो जाता है, इसलिए भगवान शिव ने पार्वती को यह कथा एकांत में सुनाने का तय किया और इस स्थान का चयन किया जहां आज अमरनाथ शिवलिंग बनता है। यहां पहुंचने से पहले भगवान शिव ने गले में पड़े छोटे-छोटे नागों को जहां छोड़ा वह स्थान अनंतनाग, जहां पर माथे के चंदन उतारा वह चंदनबाड़ी, जहां पिस्सुओं को छोड़ा वह पिस्सू टॉप तथा जहां शेषनाग को छोड़ा वह शेषनाग नामक स्थल कहलाया। ये स्थल अमरनाथ यात्रा में आते हैं। इसके बाद उन्होंने पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी। लेकिन, पार्वती कथा सुनते-सुनते बीच में सो गई। इस कथा को वहां कबूतर के एक जोड़े ने सुन ली और अमर हो गया। कबूतर का यह जोड़ा आज भी गुफा में नजर आता है। जबकि वहां और किसी परिन्दे का नामोनिशान नहीं मिलता।

अमरनाथ जाने के दो रास्ते हैं। एक पहलगाम होकर और दूसरा बलटाल से। पहलगाम और बालटाल पर बेस कैम्प है जहां से यात्रा शुरू होती है। सेना के जवान रजिस्ट्रेशन देखकर आगे प्रवेश देते है। जो लोग पैदल यात्रा नहीं कर सकते वे घोड़े या पालकी किराये पर ले सकते है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल 14 किलोमीटर है लेकिन यह रास्ता बहुत ही दुर्गम रास्ता है। यहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है। इस मार्ग से अमरनाथ की गुफा तक एक दिन में पहुंचा जा सकता है।

दूसरा रास्ता पहलगाम से है। पहलगाम से यात्रा शुरू होने के बाद पहला पड़ाव आठ किलोमीटर दूर चंदनबाड़ी में होता है। यात्री रात यहीं बिताते हैं। दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है और 14 किलोमीटर के सफर के बाद शेषनाग में अगला पड़ाव करते है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहां से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर पंचतरणी है। यहां पांच छोटी-छोटी सरिताएं बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। यह स्थान समुद्र तल से करीब 14500 फुट की उंचाई पर है। कई लोग पंचतरणी में रात बिताकर अगले दिन अमरनाथ के दर्शन करते है तो कई लोग इसी दिन अमरनाथ पहुंच जाते है। बर्फीला रास्ता होने से यहां चलने में काफी परेशानी होती है। लेकिन, बाबा के दर्शन के बाद ये यात्रा की थकान दूर हो जाती है।

सावधानियां
यात्रा का मार्ग कठिन है और काफी पैदल चलना पड़ता है। इसलिए पैदल चलने की प्रेक्टिस यात्रा पर जाने से पहले कर लेनी चाहिए।
ऑक्सीजन की कमी रहती है इसलिए दिल के मरीजों के लिए यात्रा खतरनाक साबित हो सकती है।
रास्ते में भू-स्खलन का खतरा रहता है इसलिए सावधानी रखते हुए आगे बढऩा चाहिए और वहां व्यवस्था में लगे सेना के जवानों का सहयोग करना चाहिए।
यात्रा के दौरान कम से कम सामान ले जाना चाहिए। खाने के लिए सूखे मेवे जरूर रखने चाहिए।
ऑक्सीजन की कमी महसूस होने पर कपूर सूंधने की सलाह दी जाती है लेकिन, ज्यादा सूंधना भी नुकसानदायक हो सकता है।
यात्रा पर जाने से पहले रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए। एवं श्राइन बोर्ड की ओर से तय नियमों का पालन करना चाहिए।

मन्दिर में दर्शन का समय:
मन्दिर दिनभर खुला रहता है।

Amarnath, Srinagar, Kashmir on Google Map


कैसे पहुंचें (How To Reach)

सडक़ मार्ग- जम्मू तक पहुंचने के बाद पहलगाम अथवा बालटाल तक केवल सडक़ मार्ग से पहुंचा जा सकता है। पहलगाम जम्मू से 315 किलोमीटर तथा बालटाल करीब 400 किलोमीटर दूर है।
रेलमार्ग- निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू में है।
हवाई अड्डा -निकटतम हवाई अड्डा जम्मू। बालटाल पहुंचकर अमरनाथ की गुफा से करीब छह किलोमीटर पहले तक हैलीकॉप्टर की सेवाएं भी उपलब्ध है लेकिन, इसके लिए पहले बुकिंग करानी होती है।

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