लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर, अनंतपुर, आंध्र प्रदेश (Lepakshi Veerabhadra Temple, Anantapur)


यहां 70 से ज्यादा खंभे हवा में झूल रहे हैं

आंध्र प्रदेश में एक ऐसा खास मंदिर है, जिसमें 70 से ज्यादा खंभे हवा में झूल रहे हैं। ये खंभे मंदिर को सहारा दे रहे हैं और साथ ही इनके नीचे अंतराल है। खंभों और जमीन के अंतराल में से कपड़ा निकाला जा सकता है।

यह मंदिर अनंतपुर जिले में स्थित है। मान्यता के अनुसार जब सीता का अपहरण हुआ था और रावण ने जटायु से युद्ध किया था, तो जटायु घायल हो कर इसी स्थान पर गिरे थे। भगवान राम जब यहां पहुंचे, तो उन्होंने आवाज लगाई, 'लेपाक्षी'। स्थानीय भाषा में लेपाक्षी का अर्थ है—'पक्षी उठो।'

यह मंदिर 1583 में विजयनगर के राजा के लिए काम करने वाले दो भाइयों विरुपन्ना और वीरन्ना ने बनाया था। यह भी कहा जाता है कि इसे ऋषि अगस्त ने बनाया था। इस मंदिर में शिव, विष्णु और वीरभद्र के पूजास्थल मौजूद हैं। यहां पत्थर की बनी नागलिंग प्रतिमा भी स्थापित है, जो भारत की सबसे बड़ी नागलिंग प्रतिमा मानी जाती है। मंदिर में रामपदम स्थित है, जिसे राम और सीता के चरण माना जाता है।

मन्दिर में दर्शन का समय: सुबह 5 से रात 9 बजे तक

Lepakshi Veerabhadra Temple, Anantapur on Google Map

कैसे पहुंचें (How To Reach)

सड़क: एनएच 7 से दक्षिण—पश्चिम दिशा में चिलामथुर गांव से 11.6 किलोमीटर।
रेल: हिन्दुपुर रेलवे स्टेशन से 12 किलोमीटर।
एयरपोर्ट: पुट्टाप्राथे एयरपोर्ट से 41 ​किलोमीटर।
सार्वजनिक बस, टैक्सी या निजी साधन से पहुंचा जा सकता है।
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