पागल बाबा मंदिर, वृंदावन (Pagal Baba Temple, Vrindavan)

मथुरा से वृंदावन के मार्ग में फूल की आकृति में एक विशाल संगमरमर का मंदिर है, जो देखने में काफी सुंदर है। इसे पागल बाबा का मंदिर कहा जाता है। दस मंजिला इस विशाल मंदिर की रमणीयता के आप वशीभूत हो जाएंगे।

हर मंजिल पर आप भगवान के दर्शन करते हुए चढ़ते जाते हैं और रास्ता इस तरह से बनाया गया है कि सभी मंदिरों की परिक्रमा अपने आप पूरी हो जाती है। यहां कई विद्युत चलित एवं स्वचलित झांकियां भी हैं, जो बच्चों का मनोरंजन और ज्ञानवर्द्धन करती हैं। यदि आप मथुरा—वृंदावन की यात्रा पर हैं, तो इस मंदिर के दर्शन के लिए आपको अवश्य जाना चाहिए।

कौन थे पागल बाबा?

भक्तों में प्रचलित कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण ने एक महाजन से उधार लिया। ब्राह्मण ने धीरे—धीरे उसे चुकाया, लेकिन महाजन ने आखिर में रकम के चुकाए जाने से इनकार कर दिया। मामला अदालत तक गया। अदालत ने गवाह के बारे में पूछा, तो ब्राह्मण ने कहा कि बिहारी जी ही इकलौते गवाह हैं। अदालत की ओर से बिहारी जी के मंदिर पर एक नोटिस गया। कुछ समय बाद एक वृद्ध व्यक्ति न्यायालय में गवाही देने आए और उन्होंने एक—एक तारीख बताई, जब ब्राह्मण ने अपना उधार चुकाया। महाजन के बहीखातों में हर तारीख पर उस रकम का इंद्राज था। बाद में न्यायाधीश ने ब्राह्मण से गवाह के बारे में पूछा ने ब्राह्मण ने कहा कि वह गवाह स्वयं बिहारी जी के सिवाय कोई ओर नहीं हो सकता। कहा जाता है कि वही न्यायाधीश भाव—विभोर होकर बिहारी जी की सेवा में जुट गए। बाद में वे पागल बाबा के रूप में वृंदावन आए और फिर इस ​मंदिर का काम शुरू हुआ।
मन्दिर में दर्शन का समय: मथुरा और वृंदावन में जहां अधिकतर मंदिर शाम को 4 बजे खुलते हैं, वहीं यह मंदिर थोड़ा पहले दर्शनार्थ खुल जाता है।

सर्दियों में प्रात: 6 से दोपहर 12 एवं सायं 3:30 से रात 8:30 तक।

गर्मियों में प्रात: 5 से दोपहर 11:30 एवं सायं 3:00 से रात 9:00 तक।

Pagal Baba Temple, Vrindavan on Google Map

कैसे पहुंचें (How To Reach)

सड़क: मथुरा बस स्टैंड से 9 किलोमीटर।
रेलवे स्टेशन: मथुरा रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर।
एयरपोर्ट: आगरा से 70 किलोमीटर।

मथुरा एवं वृंदावन से सभी प्रकार के यातायात के साधन उपलब्ध हैं।
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2 comments :

  1. भीष्म पितामह शांतुन एवम गंगा के पुत्र थे, ये महाभारत के प्रमुख पात्रो में से एक पात्र थे. भगवान परशुराम के शिष्य भीष्म अपने समय के अत्यधिक बुद्धिमान एवम शक्तिशाली विद्वान थे. महाभारत ग्रन्थ के अनुसार भीष्म पितामह वे योद्धा थे जो

    हर प्रकार के अश्त्र एवम शास्त्रो का काट जानते थे तथा उन्हें युद्ध में हरा पाना नामुमकिन था.

    भीष्म पितामह का वास्तविक नाम देवव्रत था तथा उनकी भीषण प्रतिज्ञा के कारण उनका नाम भीष्म पड़ा था. कहा जाता है की भीष्म पितामाह को इच्छा मृत्यु का वरदान था तथा इसके साथ ही वे भविष्य में होने वाली घटाओ को जान लेते थे.

    भीष्म पितामाह ने शरीर त्यागने से पूर्व अर्जुन को अपने पास बुलाकर अनेक ज्ञान के बाते बतलाई थी तथा इसके साथ ही उन्होंने अर्जुन को अन्य ज्ञान देते हुए 10 ऐसी भविष्यवाणियों के बारे में भी बतलाया था जो आज वर्तमान में वास्तव में घटित हो

    रहा है.


    भीष्म ने पहले ही कर दी थी इन 10 बातो की भविष्यवाणी आज हो रहे है सच !

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